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हिन्दी कविता
Wednesday, November 26, 2025
Friday, September 12, 2025
हिन्दी कविता : वक़्त से तेज
Tuesday, November 19, 2024
खोज
सोच से परे हो जो, मैं एसी बात सोचता हूं
दुनियां से दूर, एक हसीन रात खोजता हूं।
भरी दोपहरी में भी, छांव का अहसास हो
ख्वाब लगे जो, मैं एसी हयात खोजता हूं
जहाँ रोशनी घबराती हो, अंधेरों के खौफ से
उस गहरे सन्नाटे में, मैं एक राग खोजता हूं
ठहरा गया संसार जहां, वहीं मेरी शुरुआत है
पत्थर फेंक के, आसमाँ में सुराख खोजता हूं
मचल जो जाए दिल, कुछ करने की चाह में
असंभव है जो होना, मैं एसी बात खोजता हूं
भीड़ में जब होता हूं, मैं तभी अकेला रोता हूं
वीरान बस्तियों में, अक्सर बारात खोजता हूं
कहते है यही सब, कि एक नई सुबह आएगी
नींद से है नफरत, मैं रूहानी रात खोजता हूं
जेब से फकीर हूं, पर शौक मेरे नवाबी है
रेत का महल मेरा, औऱ मैं बरसात खोजता हूं
Saturday, November 16, 2024
वक़्त से तेज
न खेल मेरी हसरतों से, ए वक़्त मैं तेरा तकाजा हूं
खयालों की दुनियां मेरी भी है, मैं जिसका राजा हूं
ग़र जो बहक गया मैं, खुद को ही झोंक दूँगा
भागूंगा इस कदर मैं, कि तुझको भी रोक दूँगा
किस्मत
विचारों का समुंदर है, तो उम्मीद की है नांव भी
तपती सी धूप भी है औऱ दरख़्तों की है छांव भी
कैसे कह दूँ कि, लकीरों का मोहताज हूं मैं
करीब ही है साहिल, औऱ दरिया में है बहाव भी
शक्ति
कभी ग़र लगे तुझे, कि जो मिला वो कम है
जीत ले जहान को, ग़र सच में तुझमे दम है
रखकर टीस दिल में, कायरों सा न बन तू
तू शेर है दहाड़ दे, किस बात का वहम है
ग़र न कर सके हिम्मत, ये ख्याल त्याग दे
जो मिला बहुत है, बस यही तेरा चरम है
झूठी दलीलें नापसंद है, दुनियां को प्यारे
है हिम्मत तो दिखा दे, कि तुम तुम हो, हम हम है