विचारों का समुंदर है, तो उम्मीद की है नांव भी
तपती सी धूप भी है औऱ दरख़्तों की है छांव भी
कैसे कह दूँ कि, लकीरों का मोहताज हूं मैं
करीब ही है साहिल, औऱ दरिया में है बहाव भी
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