कुछ राहें अतीत की शायद l
आज भी मेरी राह तकती है ll
सिर्फ कहने को जिंदा है अब l
मुर्दों सी हुई हमारी हस्ती है ll
गुजरे हुए हसीं लम्हे l
लौटकर फिर क्यों आते नहीं ll
यादें जिसकी अक्सर ही l
तन्हाई में हमे डसती है ll
बेशकीमती है जब वक़्त
इस दुनिया में न जाने क्यों ll
तन्हाई भरे इस दिल की l
कीमत इतनी सस्ती हैं ll
अल्फाजों के समुन्दर में l
उतर कर जब देखा मैंने ll
हालात ए दिल बयां करे l
जो एसा लफ्ज न दिखा ll
एक गहन तन्हाई का पैग़ाम मिला हमे जिसे कि l
इस कोरे दिल पर था मुकद्दर ने इस कदर लिखा ll
अब तो वीरान सी हुई l
दिल कि हमारी बस्ती हैं ll
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