Sunday, June 23, 2024

सफर

 क्यों हुआ निराश तू, सफर से ओ मुसाफिर l 

ये तो वो लम्हा है, जो यूं ही गुजर जायगा ll


      मंज़िल जब होगी हांसिल , यकीनन l

   तुझे बस ये तेरा सफर ही याद आएगा ll


कितनी कर ले कोशिश, ये वक़्त कभी ठहरा नहीं l

तू खुद गुलाम है इसका, इस पर तेरा पहरा नहीं ll


लाख रोकना चाहेगा तू ,पर वक़्त गुज़रता जायगा l

दुनिया की इस चकाचौंध में, उलझा ही रह जायगा ll


अंत समय में तुझको , ये तेरा सफर ही याद आएगा ll


पैर तेरे जब डगमग होंगे, आँखों से देख न पाएगा l

चाह के भी उठ न सकेगा, एसा वक़्त भी आएगा ll


जीवन का ये फलसफा, जब सिमटता ही जायगा l

अंत समय में तुझको, ये तेरा सफर ही याद आएगा ll


दूर झमेलों से निकल, दुनिया अपनी आबाद कर l

आँखे अपनी बंद कर , फिर गहरी सी एक साँस भर ll


दुख दर्द को अपने भूलकर, तू हल्का आत्मसात कर l

एक सुकूं मिलेगा दिल को,  दिल हल्का हो जायगा ll


भाग दौड़ तू कर ले कितनी, कुछ भी हाथ न आएगा l 

अंत समय में तुझको , ये तेरा सफर ही याद आएगा

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