गहन अंधकार है, या पाप का प्रसार है
एक बड़े विनाश का, लग रहा आसार है
गरज रहे मेघ औऱ, काली घटाऐं छाई है
समुद्र है उफान पर, जीवों में हाहाकार है
कौन बनेगा राम, हर दिल में छुपा रावन है
बुराई की अच्छाई को, खुली हुई ललकार है
कण कण में बसे है राम, जा बता दे रावन को
जाग मिटा दे गहन तिमिर, वक़्त की दरकार है
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