काट काट सर बैरियों के,
लगाए लहू ललाट पर।
घाट घाट का नीर पिया,
रुका नहीं एक घाट पर।।
जीत जीत हर जंग अभीत,
तब तक न विचलित हुआ।
हाट हाट हर एक सम्राट,
झुका नहीं जो ठाठ पर।।
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