खोज में हूं सुकून की, शोर दिल के अंदर है
कैसा है ये फलसफा, न जाने कैसा मंजर है
उस मोड़ पर आ गया हूं, जहाँ छोर ही नहीं
डूबने की ख्वाहिश है, औऱ सामने समुंदर है
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