Sunday, November 3, 2024

संसार सार

 कोई कहता चला जा रहा है 

कोई सहता चला जा रहा है 

कोई खुद को समेटने मे लिप्त है 

तो कोई ढहता चला जा रहा है 


कोई खुद में ही खो रहा है 

कोई दूर खुद से हो रहा है 

किसी की नींदे उड़ चुकी है 

तो कोई चैन से सो रहा है 


कोई किसी की सुनता नहीं 

तो कोई कुछ कहता नहीं 

कोई अरमान पूरे कर रहा है 

कोई ख्वाब तक बुनता नहीं 


कोई खुल के हंस रहा है 

किसी का रोना दुश्वार है 

यही है नियम दुनियां का 

संसार का यही सार है 


No comments:

Post a Comment