खोज में हूं सुकून की, शोर दिल के अंदर है
कैसा है ये फलसफा, न जाने कैसा मंजर है
उस मोड़ पर आ गया हूं, जहाँ छोर ही नहीं
उम्मीदों की लहरें हैं, और सामने समंदर है
हर लहर में छिपा हुआ है, एक नया असर
खुद की तलाश का,अब पूरा हुआ सफर
डूबने की हसरतें नहीं, तैरने की चाह है
समंदर की गहराई में, मिला एक रहगुज़र
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